दिल्ली : मनीष सिसोदिया ने भाजपा नेताओं पर किया मानहानि का मुकदमा

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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को दिल्ली भाजपा के प्रमुख मनोज तिवारी सहित अन्य भाजपा नेताओं पर मानहानि का मुकदमा किया। उन्होंने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया में झूठे और अपमानजनक बयान दिए जाने का आरोप लगाते हुए भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत याचिका दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता बी.एस. जून और मोहम्मद इरशाद ने अवर मुख्य महानगर दंडाधिकारी समीर विशाल की अदालत में याचिका दायर की।

अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली और सुनवाई की तारीख 22 जुलाई मुकर्रर कर दी।

मनोज तिवारी के अलावा भाजपा के लोकसभा सदस्य हंसराज हंस व प्रवेश वर्मा, दिल्ली के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा, विजेंद्र गुप्ता और भाजपा प्रवक्ता हरीश खुराना के खिलाफ भी मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है।

सिसोदिया ने इन भाजपा नेताओं पर झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया है।

भाजपा नेताओं ने मनीष सिसोदिया पर सरकारी स्कूलों के क्लासरूमों के निर्माण में 2000 करोड़ रुपये के घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगाया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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