दिल्ली बहुत वाइब्रेंट शहर है : अभिनेत्री वानेसा किर्बी

0
199

फिल्म ‘क्राउन’ की अभिनेत्री वानेसा किर्बी को दिल्ली में घूमना-फिरना पसंद है और वह इसे वाइब्रेंट और अच्छा स्थान मानती हैं। किर्बी लंदन की रहने वाली हैं।

किर्बी ने आईएएनएस को बताया, “मैं कुछ समय के लिए दिल्ली में थी। मुझे विभिन्न स्थानों पर यात्रा करना और समय बिताना पसंद है। यह बहुत ही जीवंत और अच्छी जगह है। मैं लगभग पांच-छह साल पहले आई थी।”

किर्बी ने थियेटर के साथ शोबीज में काम शुरू किया था। उसके बाद उन्होंने बीबीसी के ‘द आवर’ के साथ 2011 में टीवी से करियर की शुरुआत की थी।

वह पीटर मॉर्गन की नेटफ्लिक्स श्रृंखला ‘द क्राउन’ से लोकप्रिय हुईं थी। वह जल्द ही ‘मिशन : इंपॉसिबल फॉलआउट’ में नजर आएंगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleसुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक्शन में केजरीवाल, राशन योजना को दी मंजूरी
Next articleसंजू के मेकिंग वीडियो से जाने रणबीर कपूर का संजय दत्त बनने का सफर
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here