दिल्ली : बाहरी उपद्रवियों के सामने एक-दूजे के लिए ढाल बने हिंदू-मुस्लिम

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उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के मौजपुर के पास मिश्रित आबादी वाला एक मोहल्ला है विजयपार्क। यहां हिंदू और मुस्लिम साथ रहते हैं। एक गली हिंदू की है तो दूसरी मुसलमान की, तीसरी हिंदू की और चौथी मुसलमान की। कुछ इसी तरह की बसावट है यहां। जब पिछले चार दिनों से उत्तरी-पूर्वी दिल्ली हिंसा की चपेट में रही, तब हिंदुओं-मुस्लिमों ने सौहाद्र्र की मिसाल पेश की। एक-दूसरे के लिए वे ढाल बनकर खड़े रहे।

दोनों समुदायों के लोग साथ-साथ मोहल्ले की पहरेदारी करते नजर आ रहे हैं। उनकी पिछले चार दिनों से यही कोशिश है कि कोई भी बाहरी उपद्रवी मोहल्ले में घुसने न पाए। उनका कहना है कि भड़काने और मारपीट की शुरुआत उपद्रवी करते हैं और फिर बचाव में स्थानीय लोग भी हिंसा में शामिल हो जाते हैं।

आईएएनएस ने मंगलवार और बुधवार दोनों दिन मौके पर जाकर दोनों समुदायों के लोगों से बात की। एक व्यक्ति ने कहा, “यहां विजय पार्क में कुछ गलियां हिंदुओं की हैं तो कुछ मुसलमानों की। मुख्य सड़क के पास वाली गलियों में हिंदू रहते हैं और पीछे की तरफ मुसलमान। हम किसी की साजिश सफल नहीं होने देंगे। हमारी बसावट ही ऐसी है कि एक-दूसरे के सहयोग के बगैर नहीं रह सकते। कोई बाहरी हमारे मोहल्ले में घुसने न पाए, इसके लिए साथ मिलकर पहरेदारी कर रहे हैं।”

यहां कुछ गलियों में गेट लगे हैं और कुछ गलियों में गेट नहीं हैं। लोगों ने दिल्ली सरकार से सुरक्षा के मद्देनजर सभी गलियों में गेट लगवाने की मांग की। लोगों ने सोमवार की देर रात से लेकर मंगलवार की सुबह का उपद्रव बयान करते हुए कहा, “पुलिस की समुचित तैनाती होने से चौथे दिन आज बुधवार को तो माहौल ठीक है। अब डर कम लग रहा है, मगर मन में आशंकाएं बरकरार हैं। सोमवार की रात करीब ढाई बजे कबीरनगर की तरफ से हेलमेट पहनकर और घातक हथियारों से आए लोगों ने कई बार हमले की कोशिशें की थीं। उन्होंने दुकानें भी लूटने की कोशिश की। ऐसे में हम अपने घर और दुकान बचाने के लिए डंडा लेकर पहरेदारी करने को मजबूर हैं।”

मोहल्ले के ही एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “तीस साल से मैं यहां रह रहा हूं, पास-पड़ोस के चेहरे परिचित हो चुके हैं। मगर पिछले चार-पांच दिनों से यहां गाड़ियों से संदिग्ध लोग आते-जाते दिखे, जिन्हें कुछ खुराफाती दिमाग के लोगों ने पनाह दी। हिंसा कर तनाव पैदा करने की कोशिशों में यही बाहरी लोग लगे रहे। मारकाट की शुरुआत बाहरी करते हैं और चाहते हैं कि स्थानीय लोग भी इसका हिस्सा बन जाएं। नासमझ लोग उनकी बातों में आकर खून-खराबा करने उतर जाते हैं।”

जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, कबीरनगर आदि इलाकों में लोगों से बात करने में कई ने हिंसा के पीछे बाहरी उपद्रवियों का हाथ होने का आरोप लगाया। लोगों ने कहा कि गाड़ियों से भरकर ऐसे लोग आसपास के मुहल्लों में पहुंचे हैं, जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया। पुलिस को सर्च अभियान चलाने के साथ किराएदारों का वेरिफिकेशन करना चाहिए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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