दिल्ली : भीड़ में घिरे 2 छात्र, गिड़गिड़ा कर बचाई जान

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मौजपुर के विजय पार्क इलाके में उपद्रवी भीड़ के बीच से 2 छात्रों ने गिड़गिड़ा कर अपनी जान की सलामती मांगी। फिर भी दोनों छात्रों को छोड़ने से पहले दंगाइयों ने उन्हें बुरी तरह लाठी-डंडों से पीटा। छात्रों को बचाने के लिए कई स्थानीय लोग आगे आए, तब उनकी जान बचाई जा सकी। विजय पार्क के छात्रों ने इलाके का माहौल बयां किया। एक पीड़ित छात्र ने बताया, “बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे मैं बगल वाली गली से ट्यूशन पढ़कर अपने घर लौट रहा था। हम दोनों डर से बाहर मेन रोड पर नहीं गए, अंदर की गलियों से ही अपने घर जा रहे थे। उसी दौरान 10-15 लोगों की भीड़ ने हमें घेर लिया।”

दूसरे छात्र ने कहा, “हाथ में लाठी-डंडे लिए इन लोगों ने बिना नाम-पता पूछे बेवजह हमें थप्पड़ मारना शुरू कर दिया। हमने अपनी सलामती के लिए दंगाइयों के हाथ-पैर जोड़े। इस बीच अच्छी बात यह रही कि हमें पहचानने वाले कुछ स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और हम दोनों को भीड़ से छुड़ाया और हमें घर तक सुरक्षित पहुंचा आए।”

वहीं, मौजपुर की तीन नंबर गली में रहने वाले एक नौकरी पेशा 47 वर्षीय व्यक्ति ने कहा ने कहा, “मंगलवार रात को घर पहुंचना बहुत मुश्किल था। रास्ते में जगह-जगह अलग-अलग किस्म के लोगों ने गुट बनाकर सड़कों, गलियों को घेरा हुआ था। क्रिकेट खेलने में इस्तेमाल होने वाला हेलमेट पहने हुए और मुंह पर रुमाल बांधे हुए चार-पांच लड़कों ने मुझे घेर लिया। मैंने उनसे दोनों हाथ जोड़कर जाने देने के लिए कहा।”

नौकरी से लौट रहे इस शख्स के मुताबिक, हेलमेट पहने इन लोगों ने उसके साथ हिंसा नहीं की, लेकिन उसे आगे न जाने की हिदायत दी और धमकी देकर लौटा दिया। इसके बाद यह शख्स लौटकर अपने रिश्तेदारों के घर दिलशाद गार्डन पहुंचा और पूरी रात वहां गुजारने के बाद बुधवार को दोपहर में अपने घर लौट सका।

मौजपुर, बाबरपुर, जाफराबाद, कबीर नगर, बृजपुरी, भजनपुरा और करावल नगर में रहने वाले सैकड़ों लोगों के साथ इस तरह की घटनाएं पेश आई हैं। दरअसल, इन सभी सड़क मार्गो पर मंगलवार को यातायात पूरी तरह प्रतिबंधित रखा गया। इसके अलावा डीएमआरसी ने मंगलवार को 5 मेट्रो स्टेशन जाफराबाद, मौजपुर-बाबरपुर, गोकलपुरी, जौहरी एन्क्लेव और शिव विहार बंद रखे थे। हालांकि, बुधवार सुबह सभी स्टेशन खोल दिए गए।

हिंसा प्रभावित इलाकों में अर्धसैनिक बलों की 35 कंपनियां तैनात की गई हैं। ब्रह्मपुरी इलाके में पथराव के बाद आरएएफ के जवानों ने फ्लैग मार्च किया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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