दिल्ली : 7.5 लाख रुपये मूल्य की नकली मुद्रा के साथ 1 गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने शनिवार को कहा कि उसने बांग्लादेश से भारत तस्करी कर लाई गई साढ़े सात लाख रुपये मूल्य की नकली मुद्रा जब्त की है, और इस संबंध में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह व्यक्ति पिछले 12 वर्षो से नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी कर उसे यहां चला रहा था। विशेष शाखा के पुलिस उपायुक्त पी.के. कुशवाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के रहने वाले आरोपी 30 वर्षीय दीपक मंडल को दिल्ली के खानपुर इलाके से गुरुवार रात गिरफ्तार किया गया। आरोपी को उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वह यहां अपने संपर्क के व्यक्ति को दो हजार रुपये के 375 नोट देने वाला था। उन्होंने कहा कि कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

उन्होंने कहा, “उसे पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से एक व्यक्ति द्वारा नियमित अंतराल पर यह काम मिलता रहता था और वह दिल्ली -एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में कई लोगों को नकली नोटों की आपूर्ति करता रहता था।”

अधिकारी ने कहा, “वह दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में पिछले एक साल के दौरान दो करोड़ रुपये के नकली नोटों की आपूर्ति कर चुका है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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