दीपन ने 60 पाउंड वजन उठाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया

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दीपन गुर्जर ने एक मिनट में 60 पाउंड वजन उठाकर अधिकतम 68 पुश अप के साथ गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है। दीपन से पहले अमेरिका के रोन कूपर ने 11 फरवरी 2016 को 60 पाउंड वजन उठाकर एक मिनट में सबसे अधिक 57 पुश अप बनाने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया था।

24 साल के दीपन ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि मैं एक मिनट में 60 किलो वजन के साथ अधिकतम पुश अप का विश्व रिकॉर्ड तोड़ने में कामयाब रहा। मैं इस सफलता का श्रेय अपने पिता रामनिवास गुर्जर, गुरु नवीन तंवर और रोहताश चौधरी को देना चाहता हूं। यह हमारे साथियों और परिवार के समर्थन का ही प्रभाव है कि मैं पिछले रिकॉर्ड की तुलना में 11 अधिक पुश अप बनाने में कामयाब रहा।”

2015 में एक मिनट में 51 पुश अप के गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड को हासिल करने वाले रोहताश चैधरी ने कहा, “यह सिर्फ एक चमत्कार नहीं है बल्कि एक बहुत अनुशासित दिनचर्या का परिणाम है जिसका पालन हमें करना होता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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