शिकायत करना आसान है, काम करना मुश्किल – दीपक मिश्रा

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जयपुर। बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि न्यायपालिका के प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और शिकायतों को अलग रखते हुए काम करने होगा तभी हम आगे बड सकते है।

सर्वोच्च न्यायालय परिसर के अंदर 72 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के बाद, सीजेआई ने कहा, “एक प्रणाली की आलोचना करना , हमला करना और नष्ट करना ये सब काफी आसन है। लेकिन इससे कठिन, मुश्किल और चुनौतीपूर्ण अगर कुछ है तो वो है इसके लिए किसी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं या शिकायतों को अलग रख कर काम करना।

मिश्रा ने कहा “सकारात्मक मानसिकता के साथ रचनात्मक कदम उठाने की जरूरत है। कंक्रीट सुधारों को तर्कसंगतता, परिपक्वता, जिम्मेदारी और स्थिरता के साथ किया जाना चाहिए। हम सभी लोगो का उत्पादक होना आवश्यक है, तभी कोई भी संस्था अधिक ऊंचाई पर जा सकती है।

जनवरी में एक अभूतपूर्व कदम में, सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों ने सर्वोच्च न्यायालय के कामकाज के संबंध में अपनी शिकायतों को मीडिया के सामने प्रसारित किया था। जस्टिस मदन बी लोकुर, कुरियन जोसेफ, रंजन गोगोई और जस्ती चेलेश्वर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया था और सर्वोच्च न्यायालय को बचाने के लिए देश को अपील जारी की थी। उन्होंने एक पत्र भी जारी किया कि उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश को शीर्ष न्यायिक संस्थान के भीतर कुप्रबंधन पर प्रकाश डाला था।

इसके बाद ये पहले बार जब दीपक मिश्र ने खुलकर अपना पक्ष रखा हो या उस मामले में कोई बात कही हो, हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन सभी का ये ही मानना है की उनका ये निशाना उन 4 जजों के लिए ही था, जिन्होनें मीडिया के सामने जाकर अपनी बात कही थी।

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