ब्राजील में Coronavirus से मरने वालों की 135,000 के पार पहुंची

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ब्राजील में कोरोनावायरस के कारण 858 और मरीजों की मौत होने के साथ देश में इस बीमारी से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 135,793 हो गई है। ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी।

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समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि इस बीच, पिछले 24 घंटों में 39,797 नए मामले दर्ज किए गए, जिससे कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4,495,183 हो गई।

ब्राजील ने हाल ही में दैनिक मौतों की औसत संख्या को कम करने में कामयाबी हासिल की है, जो पिछले सात दिनों में 779 रही, यह पूर्व के 14 दिनों के मुकाबले 9 प्रतिशत कम है।

प्रति दिन नए मामलों की औसत संख्या में भी कमी देखने को मिली है, जो पिछले सात दिनों में 31,097 रही है, यह पिछले दो हफ्तों की तुलना में 22 प्रतिशत कम है।

कोरोना से सबसे प्रभावित राज्य साओ पाउलो में 924,532 मामलों सामने आ चुके हैं और 33,678 मौतें हुई है, उसके बाद रियो डि जेनेरो में 249,798 मामले आ चुके हैं जबकि 17,575 लोग दम तोड़ चुके हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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