मैं मालिकों को बताना चाहता था कि मैं यहां किसी कारण से हूं : de Villiers

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राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ बेहतरीन पारी खेल उसके मुंह से जीत छीन वाले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के दिग्गज बल्लेबाज अब्राहम डिविलियर्स ने कहा है कि वह टीम के मालिकों को बताना चाहते थे कि वह यहां किसी कारण से हैं। डिविलियर्स ने नाबाद 55 रनों की पारी खेल बेंगलोर को एक और शानदार जीत दिलाई। इस पारी के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।

मैच के बाद डिविलियर्स ने कहा, “मैं बेहद खुश हूं। मुझे लगता है कि हमने 15-20 रन ज्यादा दे दिए थे। मैंने और विराट ने बात की थी कि हमें कुछ साझेदारियों की जरूरत है। मैं घबराया हुआ था। मैं अन्य खिलाड़ियों की तरह ही दबाव में था। मैं टीम के लिए अच्छा करना चाहता था और टीम के मालिकों को बताना चाहता था कि मैं यहां अच्छी वजह से हूं। साथ ही दोस्तों, परिवार को, खुद को भी।”

उन्होंने कहा, “पिछले मैच में मैंने अपनी जिम्मेदारी उस तरह से नहीं निभाई थी, जिस तरह से निभानी चाहिए थी। लेकिन इस बार मैंने किया।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

 

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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