पद्मश्री पाने के बाद नहीं मिल रहा काम, लौटाना चाहता हूं सम्मान: दैतारी नायक

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जयपुर। उड़ीसा के आदिवासी किसान और पद्मश्री से सम्मानित दे तारी नायक को यह सम्मान पाने के बाद 2 जून की रोटी और दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए भी अब काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है हाल ही में उन्होंने यह बात सामने रखी और बताया जा रहा है कि उनकी हालिया भी है कि जिंदा रहने के लिए भी चीटियों के अंडे खाने के लिए तैयार हैं और यह सम्मान मिलने के बाद उन्हें कोई काम भी नहीं मिल रहा है.

वही आपको बता दें कि मीडिया में अभी एक खबर आई है कि वह अपनी हालत से इतने परेशान हैं कि बताया जा रहा है कि वह अपना पुरस्कार और पद्म श्री का सम्मान वापस से सरकार को लौट आने का मन बना रहे हैं वहीं हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार दे तारीख को इसी साल उड़ीसा में 3 किलोमीटर नहर बनाने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था और उनका कहना है कि सम्मान उनकी जीवन यापन में मुश्किलें पैदा कर रहा है.

उड़ीसा के क्योंझर जिले के खनिज संपन्न ताल बत्तर ऋणी गांव में रहने वाले अधिकारी ने सिंचाई के लिए 2010 से 13 के बीच में अकेले ही गो नासिका का पहाड़ खोदकर 3 किलोमीटर लंबी नहर बना दी थी और इस नहर से अब 100 एकड़ जमीन की सिंचाई होती है. वही आपको बताते हैं कि देता जी का कहना है कि सम्मान में उन्हें गरीबी की और धकेल दिया वे कहते कि पद्मश्री ने किसी भी तरह से मदद नहीं की पहले में दिहाड़ी मजदूर पर काम करता था लेकिन मुझे काम ही नहीं दे रहे हैं क्यों क्यों नहीं लगता है कि यह मेरी प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं है अब हम चींटी के अंडे खा कर गुजर-बसर कर रहे हैं.

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