बच्चों में बढ़ रहा कॅनजेनाइटल हार्ट डिजीज का खतरा

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जयपुर। आपके कभी दिल की जन्मजात ​बीमारी के बारे में सुना होगा। मेडिकल की भाषा में इसे ही कॅनजेनाइटल हार्ट डिजीज कहा जाता है। यह बीमारी बच्चों में तब होती है जब गर्भवस्था में दिल के विकास के दौरान कुछ कमी रह जाती है।

डॉक्टर इस बीमारी के बारे में बताते है कि इस बीमारी में बच्चे के दिल में रक्त को दिशा देने वाले वॉल्व में खराबी आ जाती है। इसमें यदि वॉल्व यदि संकरा हो तो स्टेनोसिस कहलाता है और यदि फैल जाये तो वॉल्व लीकेज कहलाता है। डॉक्टर बताते है कि जन्मजात दिल के विकारों में एऑर्टिक स्टेनोसिस, माइट्रल स्टेनोसिस, या माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स प्रमुख होते हैं।

इस पर किये गये अध्ययन में सामने आया है कि ये बीमारी भारत में 1000 लोगों में से 11 लोगों में पायी जाती है। इस बीमारी में हार्ट की कई समस्या हो सकती है जैसे— हार्ट वॉल्व में समस्या, हार्ट की मांसपेशियों में समस्या, हार्ट की नलिका में समस्या आदि।

विशेषज्ञ दिल की बीमारी वाले बच्चों के बारे में बताते है कि इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को तेज चलने-फिरने, व्यायाम करने में परेशानी होती है। अन्य बच्चों की तुलना में वो भाग—दौड़ जैसे कामों पिछे रहते है। वर्तमान में इसके बारे में बताया गया है कि ऐसे समस्या दिन—ब—दिन बढ़ती ही जा रही है।

जो कि जेनेटिक, रिश्तेदारों की आपस में शादी,रूबेला वायरस इसी के साथ ही अधिक बच्चों के होने पर भी बच्चों में ऐसी समस्या हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस बीमारी के कारण बच्चों की हाइट व वजन, हाइपरटेंशन जैसी कई समस्या उत्पन्न हो जाती है।

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