सिख के किरदार में देख दादी खुश होतीं : अभिषेक बच्चन

0
78

फिल्म ‘मनमर्जिया’ में सिख की भूमिका निभा रहे अभिनेता अभिषेक बच्चन का कहना है कि उन्हें इस किरदार में देखकर उनकी दिवंगत दादी तेजी बच्चन बेहद खुश होतीं, जो सिख समुदाय से ताल्लुक रखती थीं। जब अभिषेक का पहला लुक जारी हुआ, उनके पिता महानायक अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा कर अपना गर्व जाहिर किया।

अभिषेक ने यहां आईएएनएस को बताया, “हां, डैड ने पगड़ी वाला मेरा लुक साझा किया और कहा कि वह गर्व महसूस कर रहे हैं। मेरी दादी मां सिख समुदाय से थीं, तो इन सबसे एक भावनात्मक जुड़ाव है। हालांकि, शूटिंग के लिए मैंने जब पहली बार पगड़ी पहनी तो मेरा ध्यान मेरे परफॉर्मेस पर ज्यादा केंद्रित था, लेकिन बाद में मैंने जब फूटेज देखा तो कुछ खास महसूस किया।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मेरी दादी मां मुझे पर्दे पर सरदार के रूप में देखकर बेहद खुश होतीं।” फिल्म ‘मनमर्जियां’ में अभिषेक के साथ तापसी पन्नू और विक्की कौशल जैसे कलाकार भी हैं। यह 14 सितंबर को रिलीज हो रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleधोनी ने अपनी जिंदगी का कर दिया ये बड़ा खुलासा
Next articleबॉस ने नहीं दी थी मैटरनिटी लीव, ‘ये है मोहब्बतें’ के इस अभिनेता की पत्नी का हुआ मिसकैरेज
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here