व्यापार असंतुलन से बढ़ा 2017-18 में चालू खाता घाटा

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 में व्यापार घाटे की वजह से चालू खाते का घाटा (सीएडी)बढ़कर जीडीपी का 1.9 फीसदी हुआ। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.9 फीसदी रहा जबकि पिछले साल 2016-17 में यह जीडीपी का 0.6 फीसदी था।

विदेशों से होने वाले शुद्ध विदेशी व्यापार और शुद्ध विदेशी आय प्राप्तियों का लेखा-जोखा रखता है।

देश का व्यापार घाटा 2016-17 में 112.4 अरब डॉलर था जो 2017-18 में बढ़कर 160 अरब डॉलर हो गया।

आरबीआई ने कहा, “सेवा से प्राप्त शुद्ध आय और निजी हस्तांतरण आय में इजाफा होने के कारण शुद्ध अदृश्य प्राप्तियां 2017-18 में बढ़ गईं।”

आगत के मामले में भारत में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 2016-17 के 60.2 अरब डॉलर से बढ़कर 2017-18 में 61 अरब डॉलर हो गया।

हालांकि शुद्ध एफडीआई आगत 2016-17 के 35.6 अरब डॉलर से घटकर 2017-18 में 30.3 अरब डॉलर हो गया।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध पोर्टफोलियो निवेश आगत 2017-18 में 22.1 अरब डॉलर रहा जोकि एक साल पहले 7.6 अरब डॉलर था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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