एमवे इंडिया को सीएसआर अवार्ड

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डायरेक्ट सेलिंग कंपनी एम्वे इंडिया को सीएसआर टाइम्स द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित नेशनल सीएसआर समिट एंड अवार्डस 2018 में ‘स्पेशियली-एबल्ड’ श्रेणी में ‘बेस्ट कॉपोर्रेट’ का अवार्ड मिला है।

वाणिज्य, उद्योग एवं नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने एमवे इंडिया में कॉपोर्रेट कम्यूनिकेशंस एवं कॉपोर्रेट सामाजिक उत्तरदायित्व की राष्ट्रीय प्रमुख सिमरत बिश्नोई को यह पुरस्कार प्रदान किया।

संस्थानों के उत्कृष्ट और खोजपरक सीएसआर अभ्यासों को सम्मानित करने पर लक्षित, इस पुरस्कार ने दृष्टिबाधित लोगों के कल्याण की दिशा में एमवे के निरंतर योगदान और कार्य को सम्मानित किया।

इस मौके पर सिमरत बिश्नोई ने कहा, “हम पिछले दो दशकों से दृष्टिबाधित लोगों के लिए कार्यरत हैं, इस प्रोजेक्ट ने अभी तक 2.50 लाख से ज्यादा ²ष्टिबाधित लोगों का जीवन सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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