अदालत ने चिदंबरम की गिरफ्तारी से अंतिरम सुरक्षा 26 नवंबर तक बढ़ाई

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दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को एयरसेल-मैक्सिस धनशोधन मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति को गिरफ्तारी से दी गई अंतिरम सुरक्षा को 26 नवंबर तक बढ़ा दिया है। पिता और पुत्र की गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा में विस्तार करते हुए विशेष न्यायाधीश ओ.पी. सैनी ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई को 26 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को अदालत से एयरसेल-मैक्सिस धनशोधन मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया था और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर जोर दिया था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी मिलकर यह जांच कर रहे हैं कि किस प्रकार साल 2006 में कथित रूप से कार्ति चिदंबरम ने एयरसेल-मैक्सिस सौदे में निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की उस वक्त मंजूरी हासिल की, जब उनके पिता केंद्रीय वित्त मंत्री थे।

न्यूज स्त्रेत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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