Coronavirus: कोरोना से मार्च में कमजोर रही मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां, 4 माह की सबसे धीमी रफ्तार

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कोरोना वायरस के कहर के बीच देश में मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियां मार्च 2020 में कमजोर पड़ गई है। पिछले चार माह के मुकाबले रफ्तार सबसे नीचले स्तर पर चली गयी है। एक सर्वेक्षण में ये भी सामने आया है कि इस सेक्टर में बढ़त के भी संकेत दिखाई पड़े हैं।

आईएचएस सर्वे के अनुसार, कोरोना के कारण दुनियाभर के बाजारों में कोहराम मचा है। कोरोना से निपटने के लिए कई देशों ने लॉकडाउन कर रखा है। ऐसे में दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी हो गई है। इसका असर भारत के उद्योग धंधों पर भी देखने को मिल रहा है।

IHS मार्किट सर्वे के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मार्च में घटकर 51.8 के स्तर पर आ ठहरी है। इससे पहले फरवरी के महीने में ये 54.5 थी। नवंबर 2019 के बाद सबसे कम सुधार को प्रकट करता है।

बता दें कि 32 महीनों से मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई 50 अंकों के निशान से ऊपर दर्ज की जा रही है। पीटीआई न्यूज एजेंसी के अनुसार, सूचकांक में 50 से ज्यादा विनिर्माण गतिविधियों में इजापे की ओर संकेत करता है। हालांकि इससे कम गिरावट को दर्शाता है।

सर्वे के अनुसार, 12 माह के कारोबारी दृष्टिकोण के हिसाब से देखें तो मार्च में धारणा कमजोर साबित हुई है। कुछ विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस के कारण मांग पर निकारात्म असर पड़ने की बात कही है, जो एक लंबे समय तक बनी रहेगी। कोरोना का कहर अब तेजी के साथ पूरे देश में फैल रहा है। भारत की औद्योगिक गतिविधियों की ग्रोथ रेट कम फरवरी के महीने में भी कोरोना का कारण कम थी। सर्वे में दर्शाया गया है कि पीएमआई फरवरी 2020 में 54.5 रह चुकी है।

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