Corona infection:शोधकर्ताओं ने किया खुलासा, कोरोना संक्रमितों में डाउन सिंड्रोम से मौत का ज्यादा खतरा

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जयपुर।विश्व में बढ़ती कोरोना महामारी का संक्रमण अब धीरे—धीरे कम हो रहा है लेकिन बुजुर्गो और बच्चों में में अभी कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक बना हुआ है।ऐसे में बच्चों में होने वाली डाउन सिंड्रोम की बीमारी एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक बच्चा अपने 21 वें गुणसूत्र की एक अतिरिक्त प्रति के साथ पैदा होता है।इसलिए डाउन सिंड्रोम को ट्राइसॉमी 21 भी कहा जाता है और यह शारीरिक और मानसिक विकास में देरी और विकलांगता का कारण बनता है।

डाउन सिंड्रोम से पीडितों में कोरोना का खतरा और मौत की अधिक संभावना—
हाल ही यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, नॉटिंघम विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं के द्वारा किए गए एक शोध में इस बात का खुलासा किया गया है कि डाउन सिंड्रोम बीमारी से पीडित लोगों में कोरोना संक्रमण का अधिक खतरा है और इससे मौत की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती है।
शोधकर्ताओं कोरोना संक्रमण से मौत के लिए एक जोखिम कारक होने का मूल्यांकन करने के लिए एक ‘क्यूआरसर्च’ डेटाबेस के माध्यम से 8.26 मिलियन वयस्कों के एक समूह का अध्ययन कर इस बात का दावा किया है।

शोधकर्ताओं ने कोरोना संक्रमित संबंधित अस्पताल में भर्ती होने के लिए 4 गुना बढ़ा जोखिम और डाउन सिंड्रोम वाले व्यक्तियों में कोविद -19 से संबंधित मृत्यु के लिए 10 गुना बढ़ा जोखिम पाया है।

शोधकर्ताओं ने बताया है कि हम इस महामारी के दौरान कोविड -19 परिणामों के डाउन सिंड्रोम के प्रभावों से अनभिज्ञ हैं जो अभी तक सामने नहीं आएं है।
अभी तक कोरोना वायरस की किसी प्रकार की प्रभावी दवा नहीं बनाई जा सकीं है।इसलिए कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करना बेहद आवश्यक है।

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