किसी भी लोकतंत्र के लिए प्रेस को नियंत्रित करना घातक : Solicitor General

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पत्रकार की स्वतंत्रता सर्वोच्च है और किसी भी लोकतंत्र के लिए प्रेस को नियंत्रित करना घातक होगा। मेहता ने सुदर्शन टीवी के एक कार्यक्रम ‘यूपीएससी जिहाद’ के खिलाफ दाखिल की गई याचिका पर चल रही सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

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इस टीवी कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया था कि सरकारी सेवा में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों की घुसपैठ की साजिश का पर्दाफाश किया जा रहा है।

न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा और के. एम. जोसेफ की पीठ ने सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि मीडिया में स्व नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने मेहता से कहा कि क्या यह (टीवी शो का हवाला देते हुए) एक मुक्त समाज में सहन किया जा सकता है और स्व-नियंत्रण को आगे रखा जा सकता है या नहीं?

मेहता ने जवाब दिया कि प्रेस को नियंत्रित करना किसी भी लोकतंत्र के लिए घातक होगा। इस पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या यह वास्तव में अनुच्छेद 19 (1) (ए) के अंतर्गत आता है।

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश जोसेफ ने कहा कि कोई भी स्वतंत्रता परम सिद्धांत नहीं है, पत्रकारिता की स्वतंत्रता भी नहीं है। मेहता ने मीडिया प्लेटफॉर्म के स्वामित्व पर जवाब दिया, जो अक्सर पोर्टल्स पर व्यक्त विचारों को दर्शाता है। लंच के बाद की सुनवाई में मेहता ने दलील दी कि ब्लॉग सहित विभिन्न मंच हैं, जो सभी प्रकार के विचारों पर मंथन करते हैं।

न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया घरानों को अलग-अलग ब्लॉग से अलग किया जाना चाहिए। मेहता ने दलील दी कि कुछ चैनल कुछ समय पहले ‘हिंदू आतंकवाद’ की भावना को बढ़ा रहे थे। उन्होंने कहा, “प्रश्न यह है कि सामग्री को किस सीमा तक नियंत्रित किया जा सकता है?” न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि अधिनियम कहता है कि सांप्रदायिक रिपोर्टिग नहीं की जा सकती।

सुनवाई के अंत में मेहता ने यह भी दलील दी कि उल्लंघन से निपटने के लिए वैधानिक प्राधिकरण भी हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मेहता ने प्रस्तुत किया है कि व्यापक मुद्दों को केवल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्वाइंट से नहीं, बल्कि अन्य मीडिया से भी संबोधित किया जाना चाहिए, जिसमें आपत्तिजनक सामग्री साझा की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के मुस्लिम समुदाय के लोगों के सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास करने से जुड़े कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह एक उन्माद पैदा करने वाला कार्यक्रम है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि हम एक पांच सदस्य कमिटी के गठन करने के पक्ष में है, जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ निश्चित मानक तय कर सके।

पीठ ने कहा, “हम नहीं चाहते कि यह राजनीतिक रूप से विभाजनकारी हो।”

इससे पहले शीर्ष अदालत ने शो पर पूर्व-प्रसारण प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था और केंद्र को नोटिस जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने यह कहते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था कि कार्यक्रम की सामग्री सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाली है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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