भोपाल में दुष्कर्म-हत्या के पीछे सरकार को बदनाम करने की साजिश : मंत्री शर्मा

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मध्यप्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने भोपाल में एक मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या किए जाने के पीछे सरकार को बदनाम करने की साजिश की आशंका जताई है। पुलिस को इसकी जांच का निर्देश दिया गया है।

शर्मा ने रविवार को संवाददाताओं से कहा, “आरोपी को किराए पर मकान दिया गया था। मकान जिस महिला और एक अन्य ने दिलाया था, वह भाजपा से जुड़े हैं। कहीं यह मामला सरकार को बदनाम करने की कोशिश की साजिश का हिस्सा तो नहीं है, इसकी जांच के लिए पुलिस को कहा गया है।”

राज्य सरकार के मंत्री शर्मा का यह बयान तब आया है, जब भाजपा मासूमों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर आंदोलन कर रही है। साथ ही सरकार पर कानून व्यवस्था न संभाल पाने का आरोप लगा रही है।

बीते हफ्ते कमलानगर थाना क्षेत्र की मंडवा बस्ती में रहने वाले परिवार की आठ साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले के आरोपी विष्णु प्रसाद को खंडवा से गिरफ्तार किया गया था, वह जेल में है। उसके खिलाफ चालान अदालत में पेश किया जा चुका है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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