आईएलएंडएफएस समूह की बिक्री समेत अन्य विकल्पों पर विचार : अधिकारी

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सरकार संकटग्रस्ट अवसंरचना कर्जदाता कंपनी आईएलएंडएफएस समूह को संकट से उबारने के लिए उसकी बिक्री समेत अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है। कॉर्पोरेट मामलों के सचिव इंजेटी श्रीनिवास ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस समूह को पूरी तरह से बेचना हालांकि आसान काम नहीं होगा।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा यहां आयोजित समारोह से इतर संवाददाताओं से बात करते हुए श्रीनिवास ने कहा, “जहां तक आईएलएंडएफएस का संबंध है, मेरा मानना है कि एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) को जमा की गई रिपोर्ट में सभी दृष्टिकोणों को व्यक्त किया गया है। आईएलएंडएफएस को एक समूह के रूप में बेचना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।”

उन्होंने कहा, “यह सबसे अच्छा विकल्प होगा, लेकिन इसमें गंभीर मुद्दे हैं और इसका सीमित परिणाम मिलेगा।”

श्रीनिवास के मुताबिक, दो अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें समूह की अलग-अलग कंपनियों की बिक्री या फिर इसकी परिसंपत्तियों की बिक्री शामिल है।

सचिव ने कहा कि सरकार इन सभी तीनों विकल्पों के संयोजन के साथ भी आगे बढ़ सकती है।

सरकार ने कर्ज से लदी कंपनी को उबारने की योजनाओं की रिपोर्ट एनसीएलटी की मुंबई शाखा को पिछले हफ्ते सौंपी थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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