‘संरक्षिका’ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में भी जुटे : सोनल शाह

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की पत्नी सोनल शाह ने कहा कि ‘संरक्षिका’ को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को और ऊंचाइयों पर ले जाने में मुख्य भूमिका निभानी चाहिए, ताकि संरक्षिका का उद्देश्य पूर्ण हो सके। इस अवसर पर उन्होंने ‘संरक्षिका’ के 8वें संस्करण का विमोचन भी किया। यहां सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित ‘संरक्षिका-दिवस’ पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के परिजनों सहित देश के तमाम अर्धसैनिक बलों के प्रमुख की पत्नियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। समारोह का आयोजन ‘सीआईएसएफ वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन’ के तत्वावधान में किया गया। समारोह की मुख्य अतिथि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की पत्नी सोनल शाह थीं। समारोह की अध्यक्षता सीआईएसएफ के निदेशक राजेश रंजन की पत्नी रंजीता रंजन ने की।

समारोह में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तैनात सीआईएसएफ बल के परिजनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिसमें पूर्व महानिदेशकों की पत्नियां, संरक्षिका की अधिकांश पदाधिकारी, सदस्य मौजूद थीं।

इस अवसर पर रंजीता रंजन ने कहा, “महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की सहायता से शीघ्र ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की सीआईएसएफ यूनिट में एक परिवार परामर्श केंद्र खोला जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा कि संरक्षिका, हिंदुस्तान में प्राकृतिक चिकित्सा और हरित भारत मिशन के तहत पौधों को सीआईएसएफ के रिहायशी परिसरों में बड़े स्तर पर लगाएगा।

इस आशय की जानकारी आईएएनएस से बातचीत में सीआईएसएफ के उप-महानिरीक्षक और प्रमुख प्रवक्ता डॉ. अनिल पाण्डेय ने दी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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