कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी का निधन

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कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी का बुधवार देर शाम दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 53 वर्ष के थे। भाजपा ने भी उनके निधन पर शोक जताया। त्यागी शाम 5 बजे एक टेलीविजन चैनल पर डिबेट में भाग ले रहे थे। कार्यक्रम खत्म होने के तुरंत बाद उन्हें सीने में दर्द महसूस हुआ और कुछ देर बाद बेहोश हो गए। उन्हें फौरन यशोदा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें प्राणहीन घोषित कर दिया।

गाजियाबाद के निवासी राजीव त्यागी कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाए जाने से पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य थे।

कांग्रेस ने एक बयान जारी कर कहा, “राजीव त्यागी के आकस्मिक निधन से हम गहरे सदमे में हैं। वह पक्के कांग्रेसी और सच्चे देशभक्त थे। दुख की इस घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके परिवार व मित्रजनों के साथ हैं।”

कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने कहा, “उनके असामयिक निधन से मैं स्तब्ध हूं और गहरे सदमे में हूं।”

वहीं, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “मैं विश्वासनहीं कर सकता कि मेरे मित्र राजीव त्यागी अब हमारे बीच नहीं रहे। पांच बजे शाम को तो वह मेरे साथ डिबेट में थे। जीवन का कोई ठिकाना नहीं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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