गांधी परिवार के अलावा किसी अन्य को कमान सौंपने राजी नहीं हुए कांग्रेस नेता

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कांग्रेस की कमान संभालने के लिए कांग्रेस कार्यकारिणी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में गांधी परिवार के इतर किसी व्यक्ति द्वारा पार्टी का नेतृत्व करने के जिक्र पर शनिवार को पार्टी के नेता भावुक हो गए।

कांग्रेस प्रमुख पद के लिए किसी गांधी के सिवा वे किसी दूसरे नाम पर राजी नहीं थे। कुछ नेताओं ने इस बात की भी धमकी दे डाली कि किसी गांधी के अलावा यदि कोई अध्यक्ष बना तो वे पार्टी की बैठक में हिस्सा लेने के बजाए घर में बैठना पसंद करेंगे।

इस प्रकार मसले पर फैसला हुआ और अहमद पटेल सहित पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास गए और उनसे दोबारा पार्टी की कमान संभालने का आग्रह किया।

अस्वस्थ सोनिया गांधी सीडब्ल्यूसी द्वारा पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष के लिए उनके नाम की सिफारिश किए जाने से हैरान थीं।

इस विचार-विमर्श में मौजूद पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, “उन्होंने (सोनिया गांधी) पार्टी के नेताओं से कहा, ‘आप लोगों ने अचानक यह फैसला कर लिया। मैं इसके लिए तैयार नहीं हू’।”

नाम का जिक्र नहीं किए जाने की आकांक्षा रखने वाले इस नेता ने बताया, “सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष पद को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थीं।”

नेता ने बताया, “जब कई नेताओं ने उनको बताया कि इस घड़ी में अगर गांधी परिवार शीर्ष पद पर नहीं होगा तो पार्टी बिखर जाएगी, तब वह मान गईं।”

पार्टी के नए अध्यक्ष पद पर निर्णय लेने के लिए शनिवार को सीडब्ल्यूसी की दोबारा बैठक हुई। दूसरी बैठक रात 11 बजे के करीब समाप्त हुई।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की भारी हार के बाद राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद नया अध्यक्ष चुनने की दरकार थी।

गांधी परिवार के इतर पार्टी प्रमुख के लिए किसी अन्य नाम को स्वीकार करने के लिए कोई नेता तैयार नहीं था। पंजाब कांग्रेस प्रमुख सुनील जाखड़ ने घोषणा कर दी थी कि गांधी परिवार के इतर किसी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में स्वीकार करने के बजाए वह घर में रहना पसंद करेंगे।

नेता ने आईएएनएस को बताया, “जाखड़ की राय का कई नेताओं ने समर्थन किया और उन्होंने सीडब्ल्यूसी सदस्यों को बताया कि पार्टी प्रमुख के लिए जिन नेताओं के नाम पर चर्चा चल रही है, वे उन्हें मान्य नहीं हैं।”

पंजाब के एक और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सीडब्ल्यूसी को बताया कि अगर किसी गांधी के इतर कोई शीर्ष पद पर आता है तो कई नेता पार्टी छोड़कर दूसरे दलों का दामन थाम लेंगे।

राहुल गांधी के अलावा प्रियंका गांधी के नाम पर विचार-विमर्श हुआ।

कांग्रेस नेता ने बताया, “जब प्रियंका के नाम का सुझाव दिया गया तो उन्होंने खुद ही नकारते हुए कहा कि यह संभव नहीं है।”

मालूम हो कि प्रियंका ने अपने भाई राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के उनके फैसले पर अडिग रहने को कहा था, जबकि पार्टी के सभी पांच समूहों ने उनको कांग्रेस प्रमुख बने रहने की सिफारिश की थी।

उस समय पार्टी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी से पद छोड़ने के उनके फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया, लेकिन राहुल ने जवाब में कहा कि वह जिम्मेदारियों से नहीं भाग रहे हैं, बल्कि नए अध्यक्ष की अगुवाई में वह अधिक समर्पण के साथ काम करेंगे।

दूसरी बैठक के दौरान राहुल गांधी का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद सीडब्ल्यूसी ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुना।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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