कांग्रेस का आरोप, सरकार ने लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया

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प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर अपना हमला जारी रखते हुए कांग्रेस ने रविवार को कहा कि हजारों लोग फंसे हुए हैं और बिना किसी सहायता के लंबी पैदल यात्रा करने को मजबूर और पुलिस का अत्याचार सह रहे हैं।

कांग्रेस के प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा, “फंसे हुए प्रवासी मजदूरों के प्रति सरकार की नीति ‘मदद करो’ के बजाय, ‘सड़क पे मरो’ है।”

उन्होंने कहा कि इस घबराहट की वजह कुछ और नहीं, बल्कि “योजना में कमी है, मजदूरों को कोई वित्तीय मदद की पेशकश नहीं की गई और न ही समय पर बसें तैनात की गई, ताकि उन्हें भी वैसे ही स्थानांतरित किया जा सके, जैसे एयर इंडिया ने विदेशों में फंसे भारतीयों को किया।”

वहीं पार्टी ने जनता कर्फ्यू के दिन प्रधानमंत्री के ताली बजाओ को लेकर भी हमला किया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा ताली और थाली को लेकर तीन दिन पहले ही नोटिस दिया गया था, लेकिन लॉकडाउन को लेकर 1.2 अरब लोगों को सिर्फ तीन घंटे पहले सूचना दी गई, खासकर मजदूरों के लिए, ऐसा क्यों?”

गौरतलब है कि हजारों कर्मचारी और मजदूर कोविड-19 के डर से अपने अपने घरों की ओर लौटने के लिए बेताब हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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