राष्ट्रमंडल टेटे : 12 महिला एकल खिलाड़ी मुख्य ड्रॉ में !

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नौ भारतीय खिलाड़ियों ने शनिवार को राष्ट्रमंडल टेटे चैम्पियनशिप के महिला एकल वर्ग के मुख्य ड्रॉ में जगह बना ली है। यह सभी नौ खिलाड़ी मुख्य ड्रॉ में शीर्ष-3 खिलाड़ी अयहिका मुखर्जी, अर्चना कामथ और मधुरिका पाटकर के साथ जुड़ेंगी। इससे कुल 12 भारतीय महिलाएं यहां जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में खेली जा रही इस चैम्पियनशिप के मुख्य ड्रॉ में खेलेंगी।

मुख्य ड्रॉ में कुल 24 खिलाड़ी हैं। शीर्ष-8 खिलाड़ियों को मुख्य ड्ऱॉ में सीधे प्रवेश मिला है। इन्हें पहले राउंड में भी बाई मिला है।

मुख्य ड्रॉ में क्वालीफाई करने वाले अन्य खिलाड़ियों में तीन सिंगापुर, दो नाइजीरिया और एक-एक मलेशिया तथा आस्ट्रेलिया से है।

भारत की पूजा सहस्त्रबुद्धे, रीत रिस्या और सुरभी पटवारी मुख्य ड्रॉ में जगह बनाने से चूक गईं।

वहीं पुरुष एकल में क्वालीफायर में कुल 11 भारतीय थे जिसमें से सिर्फ छह ही मुख्य ड्रॉ में जगह बना पाए। महिला एवं पुरुष वर्ग में मुख्य ड्रॉ के मैच रविवार से शुरू होंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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