राष्ट्रमंडल खेल (ट्राइथोलोन) : बरमुडा की फ्लोरा डफी ने जीता स्वर्ण

0
101

बरमुडा की ट्राइथोलोन महिला खिलाड़ी फ्लोरा डफी ने 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। वह इन राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी हैं। उन्होंने गुरुवार को 56 मिनट 50 सेकेंड का समय निकालते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।

रजत पदक इंग्लैंड की जेसिका लियरमोंथ के नाम रहा जिन्होंने 57 मिनट 33 सेकेंड का समय निकाला। कनाडा की जोआना ब्राउन 57 मिनट 38 सेकेंड के साथ कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं।

वहीं पुरुषों में दक्षिण अफ्रीका के हेनरी स्कोएमैन 52 मिनट 31 सेकेंड का समय निकाल सोना अपने नाम करने में सफल रहे। आस्ट्रेलिया के जैकब बर्टव्हीसल को रजत पदक मिला। उन्होंने 52 मिनट 38 सेकेंड का समय निकाला। स्कॉटलैंड के मार्क आस्टिन 52 मिनट 44 सेकेंड का समय निकाल कर कांसा अपने नाम करने में सफल रहे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleट्रंप ने अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर नेशनल गार्ड की तैनाती की उद्घोषणा पर हस्ताक्षर किए
Next articleघातक कहे जाने वाले रासायनिक हथियारों का सच जानिए यहां पर
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here