राष्ट्रमंडल खेल (तैराकी) : वीरधवल अगले दौर में, प्रकाश बाहर

0
142

भारत के वीरधवल खडे ने 21वें राष्ट्रमंडल खेलों की 50 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा के सेमीफाइनल में जगह बना ली है जबकि उनके हमवतन सजन प्रकाश बाहर हो गए हैं।

यहां ओपटस एक्वाटिक सेंटर में खेली गई स्पर्धा में हीट-5 में वीरधवल ने 24.52 का समय निकाला और पांचवां स्थान हासिल किया।

दक्षिण अफ्रीका के रयान कोएटजी ने इस हीट में पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने 23.94 का समय निकाला।

महाराष्ट्र के वीरधवल चोट के बाद वापसी कर रहे थे। उन्होंने धीमी शुरुआत की लेकिन बाद में रफ्तार पकड़ते हुए प्रकाश को मात दी जिनकी शुरुआत अच्छी रही थी। प्रकाश ने 25.11 का समय निकाला।

स्पर्धा के सेमीफाइनल राउंड गुरुवार को ही खेले जाएंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleस्किन ट्रीटमेंट नहीं आयुर्वेदिक केसर से दिलाती है त्वचा विकारों से राहत
Next articleआईपीएल से पहले धवन के ऊपर टूटा दुखों का पहाड़, हो गया ऐसा कुछ !
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here