राष्ट्रमंडल खेल : केन्या पर रहेगा दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया से निपटने का दबाव

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केन्या के तमाम एथलीटों के सामने यहां जारी 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया के एथलीटों से बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव रहेगा। केन्या ने अभी तक 15 खेलों में हिस्सा लिया है और सिर्फ 1986 खेलों में वह बाहर था। उसने अभी तक 220 पदक अपने नाम किए हैं।

केन्या के 125 एथलीट 15 स्पर्धाओं में हिस्सा ले रहे हैं। केन्या ने अपने पहले राष्ट्रमंडल खेलों, 1954 में एक भी पदक नहीं जीता था। उस साल न्यानडिका माइयोरो तीन मील रेस में (जो अब 5,000 मीटर है) पदक जीतने से काफी करीब से चूक गए थे। वह चौथे स्थान पर रहे थे।

चार साल बाद, एरेरे एनेंटिया और बार्टोंजो रोटिज ने इन खेलों में केन्या को पहला पदक दिलाया था। इसके बाद केन्या की झोली में पदक पर पदक आते चले गए।

राष्ट्रमंडल खेल अमूमन अगस्त में होते हैं लेकिन गोल्ड कोस्ट में इस समय शानदार मौसम के कारण खेलों का आयोजन अप्रैल में कराया जा रहा है जो 15 तारीख को खत्म होंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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