राष्ट्रमंडल खेल (साइकिलिंग) : पुरुषों की 4000 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में हारे मंजीत

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भारत के साइकिल चालक मंजीत सिंह को यहां जारी 21वें राष्ट्रमंडल खेलों की दूसरे दिन शुक्रवार को 4000 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा में निराशा हाथ लगी। एना मियेरेस वेलोड्रोम में आयोजित हुई इस स्पर्धा में मंजीत को 24वां स्थान हासिल हुआ। मंजीत ने 4000 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा को पूरा करने में चार मिनट 39.744 सेकेंड का समय लिया और 24वें स्थान पर रहे। इस स्पर्धा में 27 एथलीटों ने हिस्सा लिया।

इस स्पर्धा में शीर्ष दो स्थान पर रहने वाली चालकों के बीच स्वर्ण पदक के लिए मुकाबला होगा, वहीं तीसरे और चौथे नम्बर पर रहने वाली चालक कांस्य पदक के लिए भिड़ेंगी।

इंग्लैंड के चार्ली टेनफील्ड को पहला स्थान हासिल हुआ। उन्होंने 4 मिनट और 11.455 सेकेंड का समय लिया। स्कॉटलैंड के जॉन आर्चिबाल्ड (4 मिनट और 13.068 सेकेंड) का समय लेकर दूसरे स्थान पर रहे। दोनों अब स्वर्ण पदक के लिए मुकाबला करेंगे।

न्यूजीलैंड के डेलन केनेट तीसरे और आस्ट्रेलिया के जोर्डन केर्बी चौथे स्थान पर रहे। दोनों के बीच कांस्य पदक के लिए मुकाबला होगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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