राष्ट्रमंडल खेल (साइकिलिंग) : 3000 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा से अमृता, सोनाली बाहर

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भारतीय साइकिल चालक सोनाली मयांगलामबाम और अमृता रघुनाथ को यहां जारी 21वें राष्ट्रमंडल खेलों के दूसरे दिन शुक्रवार को महिलाओं की 3000 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा से बाहर हो गई हैं। एना मियरेस वेलोड्रोम में हुई इस स्पर्धा में सोनाली को 20वां और अमृता को 22वां स्थान हासिल हुआ।

सोनाली ने 3 मिनट और 59.028 सेकेंड के समय में 3000 मीटर स्पर्धा को पूरा किया, वहीं अमृता ने 4 मिनट और 12.437 सेकेंड का समय लेकर यह स्पर्धा पूरी की।

इस स्पर्धा में शीर्ष दो स्थान पर रहने वाली चालकों के बीच स्वर्ण पदक के लिए मुकाबला होगा, वहीं तीसरे और चौथे नम्बर पर रहने वाली चालक कांस्य पदक के लिए भिड़ेंगी।

इस स्पर्धा में स्कॉटलैंड की कैटी आर्चिबाल्ड (3 मिनट और 24.119 सेकेंड) को पहला स्थान हासिल हुआ, वहीं आस्ट्रेलिया की रेबेका वियास्क (3 मिनट और 25.936 सेकेंड) दूसरे स्थान पर रहीं।

आस्ट्रेलिया की दो एथलीटों को तीसरा और चौथा स्थान हासिल हुआ। एनेटे एडमोंडसोन (3 मिनट और 27.255 सेकेंड) ने तीसरा और एश्ले एनकुडिनोफ (3 मिनट और 27.624 सेकेंड) को चौथा स्थान मिला है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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