बीएसएनएल को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध : प्रसाद

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केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि वह सरकारी स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनी, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को पुनर्जीवित कर इसे ‘लाभदायक’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह घोषणा प्रश्नकाल के दौरान निचले सदन में की। उनके पास संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभागों का भी अतरिक्त प्रभार है।

एक सांसद के प्रश्न के जवाब में प्रसाद ने कहा, “हम बीएसएनल को पुनर्जीवित कर इसे लाभदायक बनाएंगे।”

मंत्री ने कहा कि सरकार बीएसएनएल और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) की कनेक्टिविटी के बारे में भी चिंतित है और उन्होंने कहा कि इसके पुनरुद्धार के लिए एक योजना तैयार की गई है।

एमटीएनएल मुंबई और दिल्ली में दूरसंचार सेवाएं प्रदान करती है। इसका भी स्वामित्व सरकार के पास है।

सरकार ने पिछले महीने ही बीएसएनएल और एमटीएनएल के पुनरुद्धार के लिए 69,000 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी थी। इसमें घाटे में चल रहीं दो कंपनियों का विलय, उनकी परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण और कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) की पेशकश शामिल है, ताकि संयुक्त कंपनी को दो सालों में लाभदायक किया जा सके।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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