जर्मन फुटबाल के बचाव योजना पर काम कर रहे कोच लो

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रूस में जारी फीफा विश्व के ग्रुप चरण से बाहर होने के कुछ दिन बाद ही जर्मनी फुटबाल के कोच जोआचिम लो टीम के साथ जुड़ गए हैं और उन्होंने टीम की बचाव योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व कप से बाहर होने के बावजूद वह कोच बने रहेंगे। लो ने घोषणा की है कि भविष्य में टीम की सफलता के लिए वह बचाव योजना पेश करेंगे।

अपने मार्गदर्शन में 2014 में जर्मनी को विश्व कप जीता चुके लो ने छह सितंबर को नेशंस लीग में फ्रांस के खिलाफ होने वाले मैच से पहले टीम की नई रणनीतियों पर काम करना शुरू कर दिया है।

जर्मन टीम मैनेजर ओलिवर बियरहोफ ने कहा, “लो का और मेरा मानना है कि जर्मन फुटबाल के नए युग की शुरुआत के लिए हमें ऊर्जा तैयार करनी होगी।”

डीएफबी अध्यक्ष रेनहार्ड ग्रिंडेल द्वारा लो को राहत मिलने के बावजूद जर्मनी की मीडिया और पूर्व खिलाड़ियों ने कोच की आलोचना की है। डाई वेल्ट अखबार ने लिखा, “प्रमुख को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।”

अखबार ने कहा कि वह टीम को जीवित करने के मौके चूक गए और उन्होंने मान लिया कि कई खिलाड़ी अच्छे नहीं थे। भविष्य में इस तरह की निराशा से बचने के लिए लोव को फिर से काम शुरू करना होगा।

पूर्व राष्ट्रीय कोच हंस-हबर्ट वोग्स ने टीम की कार्यनीति में बदलाव करने की मांग की है। 1996 में यूरोपियन चैंपियन जीतने वाले वोग्स ने कहा कि जर्मन फुटबॉल को आधुनिक बनना चाहिए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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