सीएम नीतीश कुुमार ने कहा, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा मंगलवार रात को आयोजित रात्रिभोज में शामिल होने से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य को विशेष दर्जा दिया जाना चाहिए।

जनता दल यूनाइटेड (जद-यू) अध्यक्ष ने यहां मंगलवार को मीडिया से कहा, “हम अब भी बिहार को विशेष दर्जा दिलाने के पक्ष में हैं। यह मुद्दा हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हम इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।”

नीतीश कुमार ने अनुच्छेद 370 हटाने की भारतीय जनता पार्टी की मांग को लेकर मतभेद के बारे में कहा, “इसमें कोई अंतर्विरोध नहीं है। हमने हमेशा यही कहा है कि अनुच्छेद 370 को नहीं हटाया जाना चाहिए, यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू नहीं किया जाना चाहिए, अयोध्या विवाद को आपसी सहमति/अदालत के हस्तक्षेप के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। हमने भाजपा के साथ जब गठजोड़ किया था, तभी से हम इन बातों पर कायम हैं।”

उन्होंने कहा कि भाजपा उनका रुख जानती है, लेकिन दोनों दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है। नीतीश ने लोकसभा चुनाव में राजग की जीत पर भी पूरा भरोसा जताया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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