सीएम कमलनाथ ने कहा, बदहाल मप्र में बीते 6 माह में उम्मीदें परवान चढ़ीं

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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के छह माह हो गए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ का दावा है कि उन्हें समस्याग्रस्त प्रदेश मिला था, जनता की उम्मीदें पूरी करने का सरकार ने अभियान चलाया और उससे हर वर्ग की जिंदगी बदल रही है। मुख्यमत्री कमलनाथ ने सोमवार को सरकार के छह माह पूरे होने पर एक ब्लॉग लिखकर अपनी बात कही है। उन्होंने ब्लॉक की सामग्री फेसबुक पर भी पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने कहा है, “एक लंबी तपन के बाद मॉनसून आपके द्वार खड़ा मिट्टी की सौंधी सौंधी खुशबुओं के साथ नए उत्साह और उम्मीदों की दस्तक दे रहा है। मगर आहिस्ते आहिस्ते बीती लंबी तपन की पीड़ाएं भी कह रहा है।”

भाजपा के 15 सालों के शासनकाल पर तंज सकते हुए कमलनाथ ने लिखा है, “बीते 15 सालों ने प्रदेश का सब कुछ झुलसा दिया था इस धूप ने। अर्थ तंत्र, सुशासन, नारी सम्मान, किसानों का जीवन, युवाओं का रोजगार, दलितों, आदिवासी भाइयों का आत्मसम्मान, सब कुछ। आíथक बदहाली का आलम यह था कि आठ हजार करोड़ रुपये का राजस्व घाटा था, कर्मचारियों की तनख्वाह के लाले पड़ रहे थे। कई बार भारतीय रिजर्व बैंक से उधार लेकर काम चलाया गया था, एक लाख 87 हजार करोड़ रुपये का कर्ज मप्र पर हो गया था, निवेश औंधे मुंह गिर गया था। सुशासन और न्याय का तो नामोनिशान नहीं था, 46 हजार बेटियां अपनी लाज नहीं बचा सकी थीं, 48 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हो गए थे, किसानों को फसलों के दाम मांगने पर गोलियां मारी जा रही थीं, बच्चों के भविष्य को व्यापमं के माध्यम से बेचा जा रहा था। अर्थात विरासत में जो कुछ मिला था, वह था ‘झुलसा और मुरझाया हुआ एक तंत्र’।”

‘लंबी झुलसती धूप के बाद मॉनसून का सुकून’ शीषक वाले ब्लॉक में एक कहावत ‘भगवान के घर देर है, मगर अंधेर नहीं है’ का जिक्र करते हुए कमलनाथ ने लिखा है, “रोहिणी जितनी तपती है, बारिश उतनी ही अच्छी होती है। अंतत: मौसम ने अंगड़ाई ली, मॉनसून आ पहुंचा है। सबसे पहले किसानों के द्वार कर्जमाफी बनकर, फिर गरीबों के घर सस्ती बिजली की सौगात बनकर। अब अपराधों में भी कमी आ रही है, बेटियां 51 हजार रुपये विवाह में मदद भी पा रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा है, “प्रदेश के नागरिकों की प्यास अब अधिकार बन रहा है (पानी का अधिकार), शहरी विकास की संभावनाएं तरक्की की नई इबारत लिख रही हैं, नया निवेश आ रहा है, औद्योगिक विकास खुशियों के गीत गा रहा है, और उसमें प्रदेश के युवा का 70 प्रतिशत स्थान सुनिश्चित किया जा रहा है, गरीबों के घर बेहद सस्ती बिजली से रोशन हो रहे हैं। कहते हैं कि बिजली की खपत समृद्घि का द्योतक है। बीते छ: माह में बिजली की खपत में 16 से 48 प्रतिशत तक वृद्घि हुई है। पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देकर आगे लाया जा रहा है। दलितों और आदिवासी भाइयों की खुशहाली का गौरव गान गाया जा रहा है।”

कमलनाथ ने आगे कहा है, “अंतत:, बीते छह माह की अपनी सरकार में प्रदेश की उम्मीदें परवान चढ़ रही हैं और बेटियां हिमालय। युवा आशान्वित हैं और किसान आश्वस्त। पिछड़े दलित और आदिवासी भाइयों की चुनौतियां अवसरों में तब्दील की जा रही हैं। गौ माता गौशालाओं में घर पा रही हैं। अब मां नर्मदा भी मैया क्षिप्रा के घर जा रही हैं, वर्षा झूम कर आ रही है और प्रदेश की तरक्की मुस्कुरा रही है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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