सीएम चंद्रबाबू मिले देवगौड़ा से, विपक्ष की एकता पर चर्चा

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने यहां गुरुवार को जनता दल-सेक्युलर (जद-एस) के प्रमुख व पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा से मुलाकात कर वर्ष 2019 के आम चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता के मुद्दे पर चर्चा की। देवगौड़ा के आवास पर घंटाभर चली बैठक के बाद नायडू ने संवाददाताओं से कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री से और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी से विपक्षी दलों की एकजुटता की दिशा में पहल किए जाने पर बात हुई।”

तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) प्रमुख ने कहा कि विपक्षी दल भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए मिलकर काम करेंगे।

उन्होंने कहा, “राजग शासन में सीबीआई, आरबीआई जैसे सभी स्वायत्त संस्थानों को बर्बाद कर दिया गया है।”

नायडू ने दावा किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की नोटबंदी जैसी नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था को संकट में धकेल दिया।

उन्होंने कहा, “विपक्षी दलों की यह जवाबदेही है कि आपस में हाथ मिलाएं और लोकतंत्र को बचाएं।”

नायडू से इस मुलाकात से एक हफ्ता पहले 1 नवंबर को जद-एस नेताओं ने विपक्षी एकता के सिलसिले में नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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