भारत बंद : बिहार में रेल, सड़क यातायात प्रभावित, जानिए !

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बिहार में सोमवार को ईंधन की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ कांग्रेस द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी बंद के कारण रेल और सड़क यातायात प्रभावित हुआ। इस बंद को राष्ट्रीय जनता दल (राजद), वामपंथी दल और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) का समर्थन प्राप्त है।

बिहार के विभिन्न हिस्सों में सोमवार सुबह से सैकड़ों कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल के नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए।

पटना, गया, भोजपुर, जहानाबाद, भागलपुर और मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशनों पर एक दर्जन लंबी दूरी की ट्रेनों को रोक दिया गया है। कई जगहों पर कार्यकर्ताओं को विरोध के लिए सड़कों पर जलते हुए टायर फेंके।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे राज्य में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई है। फिलहाल, कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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