साफ पानी के लिए तरसती छत्तीसगढ़ के इस इलाके की जनता, तस्वीरें भयावह हैं

यहां पीने का पानी है तो, पर ये साफ नहीं है। बात वैसी ही है, कि पानी से इंसान प्यास तो बुझा ले, पर उसे डर ये हमेशा होगा कि इस पानी से वो बीमार ना हो जाए। तो तस्वीरों के सहारे छत्तीसगढ़ के कांकेड़ का हाल कुछ इस तरह समझें।

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जयपुर। गर्मी का मौसम चल रहा है। इतनी तीखी धूप है कि लोगों की जान पर आ जाए। ऐसे में कुछ एक समय में ही हम पानी ढूंढने लगते हैं, जिससे कि हमारा गला तर हो सके।

भगत सिंह की एक कहानी है, जिसके अनुसार जब जेल में भगत सिंह और उनके साथी कैद किये गए थे, तब अंग्रेज़ उनके साथ अजीब तरह के ज़ुल्म कर रहे होते थे। इसमें एक ये भी था कि जब उन्हें प्यास लगती थी, तो अंग्रेज़ उन्हें पानी के जगह दूध दे दिया करते थे।

ऐसा ही कुछ नज़ारा है छत्तीसगढ़ के कांकेड़ का। यहां पीने का पानी है तो, पर ये साफ नहीं है। बात वैसी ही है, कि पानी से इंसान प्यास तो बुझा ले, पर उसे डर ये हमेशा होगा कि इस पानी से वो बीमार ना हो जाए। तो तस्वीरों के सहारे छत्तीसगढ़ के कांकेड़ का हाल कुछ इस तरह समझें।

  • ये औरत कई किलोमीटर चल कर साफ पानी की तलाश करती है और फिर एक बर्तन में पानी लेकर वापस होती है।

  • 50 साल की मनभा सोढ़ी। हाई फ्लोराइड वाला पानी पीने की वजह से आज के समय में इनके पूरे शरीर के जोड़ों में दर्द मिलता है।

  • हालांकि पानी की गंदगी चेक करने के लिए कांकेड़ में कई वॉलेंटियर रखे गए हैं, जिनकी संख्या करीब 40 है। ये वॉलिंटियर कांकेड़ में पानी की शुद्धता की जांच करते हैं।

  • पानी की शुद्धता की जांच 2 साल में एक बार की जाती है।

  • पब्लिक हेल्थ इंजिनियरिंग डिपार्टमेंट मे सभी ग्राम पंचायत में फील्ड टेस्टिंग किट्स मुहय्या करा रखे हैं, जिससे कि गांव के लोग खुद ही पानी की शुद्धता की जांच कर सकें। जांच के बाद जिस स्त्रोत का पानी साफ होता है, उसे हरे रंग से मार्क कर दिया जाता है और जिस स्त्रोत का पानी गंदा होता है, उसे लाल रंग से मार्क कर दिया जाता है।

  • टेस्ट के दौरान पता चला कि कई जगह पानी में 3 पीपीएम हाई फ्लोराइड है, जो कि अधिकतम से दुगुना है। इसके लिए कई सार्वजनिक जगहों पर फिल्टर लगा दिये गए हैं।

pics: hindustan times

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