सीआईएसएफ ने जीती ‘सतोपंथ’, अब निगाहें माउंट-एवरेस्ट पर

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केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने माउंट सतोपंथ जैसी ऊंची पर्वत चोटी को छूने की खुशी में बुधवार को दिल्ली में एक भव्य समारोह आयोजित किया। समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी थे। सीआईएसएफ प्रवक्ता हेमेंद्र सिंह ने आईएएनएस को बताया, “सीआईएसएफ के इस पहले पर्वतारोही दल का नेतृत्व वरिष्ठ आईपीएस बल के उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) रघुवीर लाल द्वारा किया गया था। सतोपंथ छूने के अभियान में शामिल बल के 16 जवानों को पांच अगस्त को रवाना किया गया था।”

दल ने 30 अगस्त को माउंट संतोपथ को छू लिया। पर्वतारोही दल में अशोका नंदिनी (सहायक कमांडेंट) सहित दो और महिलाकर्मी भी शामिल थीं। बुधवार को नई दिल्ली जिले के बाराखंभा रोड स्थित मेट्रो ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम में इस दल के सदस्यों को सम्मानित किया गया।

उन्होंने बताया, “इस विजयश्री को हासिल करने के बाद अब सीआईएसएफ के पर्वतारोही दल की नजरें माउंट एवरेस्ट को फतह करने पर लगी हैं। संभवत: यह अभियान मार्च अप्रैल 2020 में शुरू कर लिया जाएगा।”

उल्लेखनीय है कि माउंट सतोपंथ उत्तराखंड में पश्चिमी हिमालय, गंगोत्री क्षेत्र, गढ़वाल, उत्तराखंड राज्य में दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। समारोह में बताया गया कि, सतोपंथ को छूने का अनुभव माउंट एवरेस्ट को छूने की कोशिशों के दौरान बहुत काम आएगा। सम्मान समारोह के अंत में सीआईएसएफ के महानिदेशक राजेश रंजन ने आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए, अपने पहले पर्वतारोही दल के सदस्यों की खुलकर हौसला अफजाई की।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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