सीआईएसएफ ने श्रीनगर हवाईअड्डे की सुरक्षा संभाली

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केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने बुधवार को अति संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण श्रीनगर हवाईअड्डे की सुरक्षा का जिम्मा जम्मू-कश्मीर पुलिस से ले लिया। अर्धसैनिक बल ने कहा कि एक वरिष्ठ कमांडेंट रैंक अधिकारी की अगुवाई वाली एक सीआईएसएफ यूनिट 24 घंटे हवाईअड्डा की सुरक्षा करेगी। यह फैसला इस साल की शुरुआत में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लिया था। इसके साथ सीआईएसएफ के सुरक्षा कवर के तहत 62 हवाई अड्डे आ गए हैं।

1.40 लाख की संख्या वाला बल देश का एक प्रमुख मल्टी स्किल्ड सुरक्षा एजेंसी है, जिसे विभिन्न क्षेत्रों में देश के प्रमुख बुनियादी ढांचे की स्थापना के लिए सुरक्षा प्रदान करने का अधिकार दिया गया है।

सीआईएसएफ वर्तमान में परमाणु प्रतिष्ठानों, अंतरिक्ष प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, बिजली संयंत्रों, संवेदनशील सरकारी भवनों और विरासत स्थलों को सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन सहित इन विशेष प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए देश भर में सीआईएसएफ की 348 यूनिट तैनात हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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