Colombia पहुंची चीनी वैक्सीन

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साइनोवैक कंपनी द्वारा उत्पादित पहले खेप की कोविड-19 वैक्सीन 20 फरवरी को कोलंबिया की राजधानी बोगोटा पहुंची। कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान डुक माक्र्वेज, उप राष्ट्रपति मार्टा लूसिया रामिरेज और अन्य सरकारी अधिकारियों, कोलंबिया स्थित चीनी राजदूत लान ह्वू ने वैक्सीन का स्वागत किया। वैक्सीन स्वीकार करने के संवाददाता सम्मेलन में कोलंबिया के राष्ट्रपति डुक ने कहा कि कोलम्बिया और चीन ने वैक्सीन के लिए सहयोग किया, जिसको लेकर कोलंबिया उत्साहित है। टीकों से अधिक जि़ंदगियां बच सकेंगी।

कोलंबिया स्थित चीनी राजदूत लान ह्वू ने कहा कि महामारी की रोकथाम संबंधी सहयोग चीन-कोलंबिया सहयोग का महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। चीन ने महामारी को रोकने और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग करने के लिए कोलंबिया की सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की। चीन को विश्वास है कि चीन की वैक्सीन सकारात्मक भूमिका निभाएगी, और अधिक जीवन बचाएगी। साथ ही कोलम्बिया के लोगों को जल्द से जल्द सामान्य उत्पादन और जीवन में वापस आने में भी मदद करेगी।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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