चीनी वैज्ञानिकों ने कृत्रिम लकड़ी बनाने के नए तरीके विकसित किए

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चीनी वैज्ञानिकों ने जैव-उत्प्रेरित कृत्रिम लकड़ी के बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए एक नई रणनीति विकसित की है, जो प्राकृतिक लकड़ी की तुलना में हल्की और मशीनी शक्ति के साथ उच्च शक्ति वाले गुणों को प्रदर्शित करती है। साइंस एडवांसेस नामक पत्रिका में शुक्रवार को प्रकाशित अध्ययन में लकड़ी के समान जीवकोषीय सूक्ष्म संरचनाओं के साथ उच्च प्रदर्शन बहुलक सामग्री के बारे में बताया गया है।

चीन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूएसटीसी) के यू शुहोंग के नेतृत्व में एक शोध टीम ने स्व-समूहन और थर्मोक्यूरिंग प्रक्रिया द्वारा परंपरागत फेनोलिक राल और मेलामाइन राल को कृत्रिम लकड़ी समान सामग्री में परिवर्तित किया।

यू ने कहा, “एक प्रकार के बायोमिमेटिक इंजीनियरिंग सामग्री के रूप में जैव-उत्प्रेरित बहुलक लकड़ी की यह नई किस्म कठोर वातावरण में उपयोग की जाने वाली प्राकृतिक लकड़ी का स्थान ले सकती है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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