चीन ने चली चाल – नेपाल को चार बंदरगाह के इस्तेमाल की दी अनुमति, भारत नेपाल के बीच दूरी बढ़ाने का है दावं

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जयपुर, चीन ने भारत व नेपाल के बीच दूरी बनाने के लिए एक नई चाल चली है इसके तहत उन्होंने नेपाल को अपने चार बंदरगाह और तीन लैंड पोर्ट का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। माना जा रहा ह कि चीन का यह कदम भारत के लिए नुकसान दायक हो सकता है। चीन के इस कदम से नेपाल की निर्भरता भारत पर काफी हद तक कम हो जाएगी। साल 2015 में नेपाल में आवश्यक चीजों की आपूर्ति की कमी हो गई थी।

जिसके चलते नेपाल ने भारत से अपनी निर्भरता कम करने का फैसला कर लिया था। यह चीनी विशेषज्ञों का मानना है। बताया जा रहा है कि उसी समय में चीन ने नेपाल के साथ संबंध मजबूत कर लिए थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चीन के शैनजेन, लियानयुगांग, झाजियांग और तियानजिन सी-पोर्ट का अब नेपाल अपने कार्यों के लिए इस्तेमाल कर सकेगा।

तियानजिन बंदरगाह नेपाल के लिए सबसे पास पड़ता है। यह नेपाल से महज तीन हजार किलोमीटर की दूरी पर है। जिसके लिए चीन ने इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। चीन की तरफ से नेपाल को दी गई व्यवस्था के अनुसार तिब्बत में शिगाट्स के रास्ते सामान ले जाने वाले नेपाल के ट्रकों और कंटेनरों को लाइसेंस जारी किए जाएंगे। बता दें कि अब से पहले नेपाल पूरी तरह भारत के बंदरगाहों पर निर्भर था।  लेकिन अब चीन के इस सहयोग से नेपाल की भारत से निर्भरता कम हो जाएंगी।Image result for चीन नेपाल ट्रंक

नेपाल वाणिज्यिक मंत्रालय के संयुक्त सचिव रवि शंकर सैंजू ने बताया कि नेपाल के बिजनेसमैनों को अब अन्य देशों में माल निर्यात करने व आयात करने के लिए चीन की औऱ से भूमी मार्ग भी उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि साल 2016 में दोनों देशों के बीच एक करार हुआ था। जिसमें नेपाल के कारोबारियों को छह रास्तों से नेपाल में एंट्री होनें की इजाजत दी गई थी। बता दें कि उस दौरान चीन के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने चीन की यात्रा भी की थी उसी समय यह समझौता किया गया था।

 

 

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