चीन ने महामारी की रोकथाम में कारगर कदम उठाए हैं : ब्रूस आयलवार्ड

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चीन-विश्व स्वास्थ्य संगठन के एनसीपी के प्रति संयुक्त विशेषज्ञ दल के विदेशी अध्यक्ष, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक के उच्च स्तरीय सलाहकार ब्रूस आयलवार्ड ने जिनेवा में स्थित डब्ल्यूएचओ के मुख्यालय में कहा कि चीन ने महामारी की रोकथाम में कारगर कदम उठाए हैं। चीन-विश्व स्वास्थ्य संगठन के संयुक्त विशेषज्ञ दल महामारी विज्ञान, विषाणु विज्ञान, नैदानिक प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों से आए 25 चीनी-विदेशी विशेषज्ञों से गठित है। उन्होंने क्रमश: चीन के पेइचिंग, क्वांगतुंग, स्छ्वान व हूपेई का नौ दिवसीय दौरा किया।

इस मौके पर ब्रूस आयलवार्ड ने कहा कि दल के विशेषज्ञों ने वायरस से जुड़ी जानकारी, महामारी की स्थिति, महामारी के फैलने की विशेषता, रोग की गंभीरता, और चीन सरकार द्वारा उठाये गये कदम आदि पक्षों में गहन रूप से विचार-विमर्श किया। उन्होंने विभिन्न देशों से सक्रिय रूप से निगरानी करने और आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी, और विभिन्न देशों से महामारी से जुड़ी सूचना साझा करने की अपील की, ताकि सभी लोग एक साथ इस चुनौती का मुकाबला कर सकें।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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