चीन ने चांग ई-4 मिशन को सफल बताया

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चीन ने शुक्रवार को चांग ई-4 मिशन को पूरी तरह सफल बताया। इस मिशन में अंतरिक्षयान ने चंद्रमा के सुदूर क्षेत्र में कदम रखा था। रिले उपग्रह क्वीकियाओ (मैगपी ब्रिज) की सहायता से चांग ई-4 के रोवर युतु-2 (जेड रैबिट-2) और लैंडर ने एक-दूसरे की तस्वीरें ली हैं, जो इसके सुचारु रूप में कार्य करने का संकेत है।

चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (सीएनएसए) ने कहा कि जांच में शामिल वैज्ञानिक उपकरणों ने अच्छी तरह से काम किया है और रोवर द्वारा ली गई तस्वीरें और डेटा को वापस ग्राउंड कंट्रोल में भेज दिया गया है।

शुक्रवार शाम 4.47 बजे बीजिंग एयरोस्पेस कंट्रोल सेंटर में लैंडर और रोवर की तस्वीरें एक बड़ी स्क्रीन पर दिखाई गईं। दोनों लैंडर पर चीनी राष्ट्रध्वज नजर आ रहे थे और तस्वीरों की पृष्ठभूमि में चंद्रमा की सतह नजर आ रही थी।

चांग ई-4 तीन जनवरी को 177.6 डिग्री पूर्वी देशांतर और 45.5 डिग्री दक्षिणी अक्षांश में चांद के अनदेखे हिस्से में उतरा था और फिर बीती रात रोवर चंद्रमा की सतह पर उतरा था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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