बच्चों को उनका बचपन लौटाने की जरूरत : दिव्या दत्ता

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बॉलीवुड अभिनेत्री दिव्या दत्ता का कहना है कि बच्चों को अपने दैनिक जीवन से तनाव और दबाव से दूर रखना चाहिए। यूनीसेफ और बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था क्राई फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक चर्चा सत्र में दिव्या फिल्मकार अमोल गुप्ते के साथ आई थीं।

दिव्या ने कहा, “बच्चों को उनका बचपना लौटाने की जरूरत है। वे अगर फिल्मों और कार्यक्रमों की शूटिग के दौरान सेट पर हैं, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी शिक्षा, नींद और पुनर्निर्माण से कोई समझौता न हो। इसके लिए हम सबकों कदम उठाने होंगे।”

उन्होंने कहा, “उनसे उनका बचपना न छीनें। एक सुंदर संतुलन ही मंत्र है।”

उन्होंने सेट पर बच्चों पर नजर रखने के लिए वहां परामर्शदाताओं को रखने की सलाह दी। इस दौरान रिएलिटी शो के दौरान बाल कलाकारों के मानसिक स्वास्थ्य का भी मुद्दा उठाया गया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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