चिदंबरम ने कहा, आवाज दबाई जा रही

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पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के एक दिन बाद राज्यसभा पहुंचे और उन्होंने चिंता जताई कि सरकार द्वारा आवाज दबाई जा रही है। चिदंबरम ने सदन के बाहर मीडिया से कहा, “मैं चिंतित हूं। हमारी आवाज को दबाया जा रहा है।”

तिहाड़ जेल में 106 दिन बिताने के बाद, वह बुधवार शाम जेल से बाहर निकले। वह गुरुवार दोपहर कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करेंगे।

चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड(एफआईपीबी) की मंजूरी देने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) ने 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। यह मामला तब का है, जब वह देश के वित्तमंत्री थे।

उन्हें पांच सिंतबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान, 16 अक्टूबर को, उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन रोकथाम अधिनियम(पीएमएलए) की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था। 17 अक्टूबर के बाद से, चिदंबरम को 30 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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