छत्तीसगढ़: जरूरतमंदों के लिए वरदान बन रही ये ‘दीवार’, जानिए इसके बारे में !

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छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में जरूरतमंदों के लिए एक अनूठी पहल की गई है। इस पहल को नाम दिया गया है ‘नेकी की दीवार’। ‘नेकी की दीवार’ से प्रतिदिन लगभग 50 से 100 जरूरतमंद लोगों को कपड़े, खिलौने, फल, झोले, बैग, शॉल, स्वेटर, जूता, चप्पल सहित दान में दिए गए जरूरत के अन्य सामान उपलब्ध हो रहे हैं।

‘नेकी की दीवार’ का संचालन जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के स्टेडियम ग्राउंड परिसर एवं जिला चिकित्सालय परिसर में कलेक्टर किरण कौशल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

‘नेकी की दीवार’ का संचालन इस सिद्धांत पर किया जा रहा है कि यदि आपके पास किसी सामान की आवश्यकता नहीं है तो यहां छोड़ जाएं और यदि आपको आवश्यकता है तो यहां से ले जाएं।

स्टेडियम ग्राउंड परिसर स्थित ‘नेकी की दीवार’ से अब तक लगभग 3 हजार 800 जरूरतमंदों को सामग्री का वितरण किया गया है। दानदाताओं से सामग्री का संग्रहण एवं जरूरतमंदों को सामग्री के वितरण का कार्य कोटेया ग्राम निवासी दिव्यांग वंशधारी द्वारा किया जा रहा है।

वंशधारी ने आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है और उसे समाज कल्याण विभाग द्वारा कम्प्यूटर संचालन का प्रशिक्षण भी दिया गया है। वंशधारी द्वारा दान में दी गई वस्तुओं का बेहतर रख-रखाव एवं रजिस्टर का अद्यतन संधारण किया जा रहा है। वह मानदेय के साथ जनसेवा का अवसर प्राप्त होने पर आह्लादित है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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