छत्तीसगढ़ : दुर्ग में दुर्लभ प्रजाति के 125 कबूतरों की चोरी, जानिए !

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में बुधवार को चोरी का अनोखा मामला सामने आया है। दरअसल ये चोरी ज्वलेरी या अन्य कीमती सामानों की नहीं है, बल्कि ये चोरी दुर्लभ चैम्पियन कबूतरों की है। वह भी एक-दो नहीं, पूरे 125 कबूतरों की चोरी का है।

इन कबूतरों के बारे में इनके मालिक राजू बंगाली का कहना है कि उनके चैम्पियन लगातार 9 घंटे तक उड़ान भर सकते हैं। उन्हें देखने छत्तीसगढ़ ही नहीं, दूसरे राज्यों के लोग भी उनके घर आते थे।

राजू बंगाली ने अपने दो मंजिला मकान के ऊपरी मंजिल में इन कबूतरों के लिए दो कमरों में घर बनाया है। उनका कहना है कि चोरी गए कबूतर कोई आम नहीं, बल्कि सभी चैम्पियन हैं। इन कबूतरों ने कई पदक जीते हैं। मई-जून में होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में इन कबूतरों को हिस्सा लेना था, लेकिन चोरी हो जाने से वे काफी परेशान हैं।

गौरतलब है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (हैदराबाद) में पदस्थ अजय भारतंग ने भी राजू को 20 से अधिक कबूतर भेंट की थी। इन कबूतरों के पैरों पर राजू ने डीआईजी का टैग लगाया हुआ था, इनमें 10 से अधिक टैग वाले कबूतर भी चोरी हो गए हैं।

बहरहाल, दुर्ग के पद्मनाभपुर पुलिस चौकी में कबूतरों की चोरी की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। वहीं पद्मनाभपुर चौकी प्रभारी प्रमोद श्रीवास्तव का कहना है कि कबूतर चोरी के मामले में अपराध दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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