छत्तीसगढ़ : नक्सलियों ने ट्रकों में आग लगाई

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छत्तीसगढ़ में गुरुवार आधी रात नक्सलियों ने बचेली बैलाडीला ट्रक ओनर्स एसोसिएशन कार्यालय के पास खड़े पांच ट्रकों में आग लगा दी। इससे ग्रामीणों में दहशत है। इस दौरान नक्सलियों ने एक पर्चा भी फेंका, जिसमें उन्होंने आगजनी की घटना को अंजाम देने की बात कबूली है। थाना बचेली के प्रधान आरक्षक एस.आर. गावड़े ने बताया कि यह घटना देर रात लगभग 2 बजे की है।

प्रथम दृष्टता पता चलता है कि घटना स्थल पर कुछ हथियारबंद नक्सली आए और ट्रकों में आग लगा दी। इसके बाद सभी फरार हो गए। पर्चा बारिश के पानी से पूरी तरह गीला हो चुका है, उसे सूखा कर उसकी जांच की जाएगी। पर्चे में कुछ नक्सलियों के नाम लिखे हैं, जिनमें जैनी, चंदरु, सुगना, शांति, भीमे, मासे, बुधरी का नाम लिखा हुआ है। यह पर्चा भैरमगढ़ एरिया कमेटी सचिव सुमित्रा ने जारी किया है।

गौरतलब है कि पिछले दो दिन में यह तीसरी नक्सली वारदात है। इससे पहले नक्सलियों ने धुरली भांसी थानाक्षेत्र में दो बस और एक ट्रक को आग के हवाले किया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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