छत्तीसगढ़ : नक्सली भीमा मुठभेड़ में घायल, गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में कई नक्सलियों के घायल हो गए। पुलिस एक घायल नक्सली भीमा मड़कामी को गिरफ्तार करने में कामयाब रही। उसे जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

बस्तर डीआईजी रतनलाल डांगी ने बताया कि गुरुवार को किरंदुल थाने से संयुक्त पुलिस बल गश्त सर्चिग के लिए रवाना हुई थी। ग्राम मड़कामीरा और समलनार के बीच घात लगाए नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभालते हुए गोलीबारी की।

लगभग एक घंटे की मुठभेड़ के बाद नक्सली घने जंगल और पहाड़ी की आड़ लेकर भाग गए। मौके से एक घायल नक्सली को गिरफ्तार किया गया, जिसकी भीमा मड़कामी के रूप में शिनाख्त की गई है।

डांगी ने बताया कि मुठभेड़ स्थल पर मौजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्य, खून के धब्बे और घसीटे जाने के निशान से यह साबित होता है कि कुछ नक्सली मारे गए हैं और कई लहुलूहान हुए हैं। घायल साथियों को नक्सली अपने साथ ले जाने में कामयाब रहे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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